एटलस (पहली ग्रीवा वांशका, C1) (Atlas)
केवल शैक्षिक सामग्री — चिकित्सकीय सलाह नहीं।
शरीर रचना
पहली ग्रीवा वांशका — बिना तने और स्पाइनस प्रोसेस वाला छल्ला: अग्र और पश्च मेहराब दो पार्श्व द्रव्यमान जोड़ते हैं, जिनकी ऊपरी फैसेट ऑक्सिपिटल कंडाइल ग्रहण कर एट्लांटो-ऑक्सिपिटल जॉइंट में सिर हिलाने की क्रिया देती हैं; अनुप्रस्थ बंध एक्सिस के डेन्स को मेरुरज्जु से दूर रखता है।
नैदानिक टिप्पणियाँ
जेफर्सन फ्रैक्चर (अक्षीय भार से दोनों मेहराबों का फटना) में टुकड़े बिखर जाने से मेरुरज्जु अक्सर बच जाती है; एट्लांटोएक्सियल अस्थिरता मेरुरज्जु को सीधे खतरा देती है।
संबंधित संरचनाएँ
शैक्षिक संदर्भ
सामान्य प्रश्न
एटलस (पहली ग्रीवा वांशका, C1) शरीर में क्या काम करती है?
पहली ग्रीवा वांशका — बिना तने और स्पाइनस प्रोसेस वाला छल्ला: अग्र और पश्च मेहराब दो पार्श्व द्रव्यमान जोड़ते हैं, जिनकी ऊपरी फैसेट ऑक्सिपिटल कंडाइल ग्रहण कर एट्लांटो-ऑक्सिपिटल जॉइंट में सिर हिलाने की क्रिया देती हैं; अनुप्रस्थ बंध एक्सिस के डेन्स को मेरुरज्जु से दूर रखता है।
एटलस (पहली ग्रीवा वांशका, C1) का नैदानिक महत्व क्या है?
जेफर्सन फ्रैक्चर (अक्षीय भार से दोनों मेहराबों का फटना) में टुकड़े बिखर जाने से मेरुरज्जु अक्सर बच जाती है; एट्लांटोएक्सियल अस्थिरता मेरुरज्जु को सीधे खतरा देती है।
स्रोत और लाइसेंस
Derived from Z-Anatomy (Gauthier Kervyn et al.), CC BY-SA 4.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0/); upstream geometry from BodyParts3D, © The Database Center for Life Science. लाइसेंस विवरण